उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट गैपुरा (ददरा)मिर्जापुर में ।। 12 मार्च को भारत के प्रधानमंत्री विकास पुरूष श्री Narendra Modi जी और फ्रांस के राष्ट्रपति आ रहे है उद्घाटन करने।।





कम्युनिस्ट नेता TV पर एक विदेशी आतंकवादी लेनिन की तुलना श्यामाप्रसाद मुखर्जी और बाबा साहब अम्बेडकर से कर रहे हैं, इन्हें लाल सलाम की नही लाल दुकान की ज़रूरत है ।
Hon’ble PM Narendra Modi Rajnath Singh Shyam Jaju Anand Sahu Anand Sahu BJP Bharatiya Janata Party (BJP)
Happy to Address:
Construction Industry Development Council’s 22nd Annual Day Function and 10th CIDC Vishwakarma Award winners distribution Program at India Habitat Centre.Congratulation to the Award winners and special best wishes to the CIDC organising team for organizing one of the challenging program.
#Anandsahu


त्रिपुरा की जीत अब तक की सबसे बड़ी जीत है, क्योंकि यह जीत किसी पार्टी के खिलाफ नही बल्कि वामपंथी विचारधारा के खिलाफ जीत है, जनता जनार्दन ने नंगेपन की विचारधारा को नकार दिया और संघ की पवित्र राष्ट्रवादी विचारधारा को अपना लिया है ।
जहाँ विरोध करने पर मोबाइल फ़ोन टावर से बांध कर महिलाओं से गैंग रेप होते थे, जहां पिछले एक साल में 9 स्वयंसेवकों की हत्या कर दी गयी थी वहाँ अब राम राज्य आ गया, न्याय होगा ।

हमारे मोहल्ले में एक पहलवान रहा करते थे, ऊंचे कद काठी के और हुष्ट पुष्ट, मौहल्ले में कई समस्याएं थी, न अधिकारी सुनते थे न पार्षद न नेतागण, सभी परेशान थे….
मौहल्ले की मीटिंग बुलाई गई, समस्याओं पर चर्चा हुई, तभी पहलवान उठ खड़े हुए, बोले देखो अधिकारियों, नेताओं के घर के आस पास गंदगी है? नही है, उनके यहाँ पानी की समस्या है? नही है, उनके यहाँ सीवर की समस्या है? नही है, किसी के यहाँ कोई समस्या नही है जबकि ये हमारे पैसें पर पलते हैं इन्हे हमारे पैसों से तनख्वाह मिलती है, हमारे मौहल्ले के आवंटित पैसों से ये काली कमाई करते हैं, ये ऐसे नही मानेंगे इनकी धुनाई करो तभी ये मानेंगे, पहलवान जी का भाषण ज़बरदस्त था सब का ब्रेनवाश हो गया और सब कानून अपने हाँथ में लेने को तैयार हो गए, पर समस्या थी कि शुरुआत कौन करेगा? सो पहलवान जी ने कहा तुम सब पीछे रहना मैं निपट लूंगा..
जब नगर निगम का कर्मचारी आया तो पहलवान जी उस पर पिल पड़े, उसकी जम कर धुनाई कर दी, बात आग की तरह फैल गयी, अधिकारियों में खौफ बैठ गया, डर के मारे अधिकारियों ने तुरंत काम करवा दिया, मौहल्ले वाले खुश, आनन फानन में मौहल्ला मीटिंग बुलाई गई और पहलवान जी को अध्यक्ष बना दिया गया …
पहलवान जी ने अध्यक्ष बनते ही अपना रौब और रुतबा अधिकारियों और नेताओं पर गाँठना शुरू कर दिया, जो बात ना माने उसकी धर के धुलाई कर देते, अब तो पहलवान जी का सिक्का चलने लगा, सभी डरने लगे पहलवान जी से, उधर पहलवान जी ने अपना रौब मौहल्ले पर भी दिखाना शुरू कर दिया, कुछ समय बाद वही अधिकारी और नेताओं ने पहलवान से दोस्ती कर ली, अब समस्या जस की तस थी, क्योंकि नेता और अधिकारी काली कमाई का कट पहलवान को पहुचाने लगे थे, जिस काली कमाई के विरोध में कल तक पहलवान जी थे आज वही काली कमाई और मलाई पहलवान जी को भा रही थी और मौहल्लेवासी परेशान थे…
सब ने सोचा कि पहलवान को बदल देना चाहिए सो अगले चुनाव में उनके खिलाफ प्रत्याशी खड़ा किया गया, लेकिन अब तक पहलवान बहुत ताकतवर हो चुका था, सो उसने प्रत्याशी की जम लर धुनाई कर दी हाँथ पाँव तोड़ दिए, नेताओं और अधिकारियों से सांठ गांठ कर के चुनाव जीत लिया, अब पहलवान फिर सत्ता पर काबिज था, अब हालात बाद से बदतर हो गए, जो कोई पहलवान से शिकायत करने जाए पहलवान उसे ही कुट देता था, पहलवान ने मौहल्ले को अपनी निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था, और अपने बाप की एक मूर्ति चौराहे पर लगवा दी, बात सबको खटक रही थी पर कोई बोलने की हिम्मत नही जुटा पा रहा था…
इधर एक बार फिर चुनाव होना था, इस बार जिसकी हड्डी पसली तोड़ी गयी थी वो फिर से मैदान में उतर गया, चुप चाप सब से समर्थन मांग कर चुनाव लड़ा, नतीजे आए तो सब हैरान थे, पहलवान हार गया और नया लड़का जीत गया, भ्रष्ट नेता और अधिकारियों की हवा निकल गयी पर उन्होंने तुरंत पाला बदल लिया, अब पहलवान अकेला पड़ गया, मौहल्ले वासियों ने सबसे पहले पहलवान के बाप की मूर्ति उखाड़ फेंकी, पहलवान ने एक एक कर के सभी को कभी न कभी पीटा था, सो सब एक हो कर पहलवान के घर जा धमके, पहलवान समझ चुके थे अगर जनता के हाँथ चढ़ गया तो उसका कीमा बन जायेगा, सो बुरखा पहन कर भाग निकला, उधर पहलवान के नाजायज़ बच्चे धरना दे रहे हैं कि पहलवान के साथ गलत हो रहा है ।
त्रिपुरा की भी एकदम ऐसी ही कहानी है, लोगों को बरगला कर कम्युनिस्ट ने सरकार बनाई, फिर जम कर दादागिरी की, जो शिकायत करे या सरकार के विरुद्ध जाए उसे मरवा दिया गया महिलाओं के साथ गैंगरेप किये गए, जनता भरी बैठी थी की अचानक उसकी नज़र नए लड़के विप्लव देव पर पड़ी, जिस पार्टी को पिछली बार 1.3% वोट मिले थे उसे जनता ने 50% से अधिक वोट दे कर जीता दिया, कम्युनिस्ट राज्य को अपनी निजी संपत्ति समझ रहे थे जनता ने कम्युनिस्ट के बाप लेनिन की मूर्ति उखाड़ फेंकी, अब कम्युनिस्टों की नाजायज़ औलादें छाती पीट रहीं हैं कि त्रिपुरा में गलत हो रहा है, गलत तो तब हो रहा था जब हत्यायें हो रही थीं, गलत तो तब हो रहा था जब महिलाओं के साथ गैंगरेप हो रहे थे, आज तो सिर्फ मूर्ति उखड़ी गयी है लेकिन झूठा प्रोपोगंडा फैलाया जा रहा है कि वहाँ हालात खराब हैं, जबकि एक भी व्यक्ति का ना तो हाँथ टूटा न पैर, जबकि कम्युनिस्ट होते तो अब तक सैंकड़ो लोगों के हाँथ पाँव काट दिए गए होते ।
त्रिपुरा में गुंडो की अराजकता का कुशासन खत्म होते ही देशद्रोही माफिया कम्युनिस्ट के कार्यालयों पर जनता का गुस्सा निकलना परसों से चालू है, जो कल तक नंगी तलवारें ले कर सड़क पर घूमते थे, लोगों को भरे चौराहे पर मौत के घाट उतारते थे, सरेआम बलात्कार करते थे, आज उनकी जान के लाले पड़े हैं, कल के गुंडे माफिया कम्युनिस्ट आज अंडरग्राउंड हो चुके हैं, छुपते फिर रहे हैं, कल ऐसे ही एक बड़े भारी दादा भाई को जनता ने पकड़ लिया, अपने आपको डॉन समझने वाला कम्युनिस्ट टुच्चा कल बुरखा पहन कर औरत बन कर भागने का प्रयास कर रहा था, जनता ने धर दबोचा और जम कर पूजा कर दी, मुझे तो चाइना गेट फ़िल्म के जगीरा की याद आ गयी, कमोवेश पूरे त्रिपुरा में यही हाल है, जनता चुन चुन कर चीन परस्त देशद्रोही कम्युनिस्ट गुंडों की धुलाई कर रही है, इस सब के बीच कल ही त्रिपुरा में मार्क्स लेनिन (एक विदेशी व्यक्ति जिसकी की मूर्ति भारत मे लगाने का कोई औचित्य ही नही था) की मूर्ति को जनता ने बुलडोज़र मंगवा कर उखाड़ फेंका, ये शुरुआत है त्रिपुरा में राष्ट्रवाद की और विदेशी पार्टी यानी कम्युनिस्ट पार्टी (देशद्रोही पढ़ा जाए) के अंत की, इस से सबसे ज़्यादा चिंता चीन को हो रही है क्योंकि अब दाल नही गलने वाली, भारत के लिये यह सबसे सुखद खबर है, पूर्वोत्तर सीमा अब सुरक्षित हो रही है, देशद्रोहियों का खात्मा हो रहा है, जनता जाग रही है ।
वेहद प्रश्नता हुईं मिलकर। जरूर पढ़े व सलामी दें इन वीरों को।मुझे आप दोंनो से दो बातें करने का अवसर मिला यह मेरे जीवन की सबसे ज्यादा बेहतर और रोंगटे खड़े करने वाली गौरवशाली यादगार पल बन गया।
परमवीर चक्र पुरस्कार युद्धकाल में अदम्य साहस, शौर्य दिखाने पर वीरों के सम्मान में दिए जाने वाला भारत देश की सर्वोच्च सैन्य अलंकरण है। देश के 21 वीरों को अब तक यह सर्वोच्च वीरता पुरस्कार मिल चुका है, ज्यादातर स्थितियों में यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है। इस पुरस्कार की स्थापना 26 जनवरी 1950 को की गयी थी जब भारत[गणराज्य]घोषित हुआ था। भारतीय सेना]] के किसी भी अंग के अधिकारी या कर्मचारी इस पुरस्कार के पात्र होते हैं एवं इसे देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न के बाद सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार समझा जाता है। इससे पहले जब भारतीय सेना ब्रिटिश सेना के तहत कार्य करती थी तो सेना का सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रास हुआ करता था।
?ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव अठारहवीं बटालियन, द ग्रेनेडियर्स4 जुलाई, 1999टाइगर हिल्स, कारगिलक्षेत्र
एवम
?राइफलमैन संजय कुमार तेरहवीं बटालियन, जम्मू कश्मीर राइफल्स5 जुलाई, 1999फ्लैट टाप क्षेत्र, कारगिल।

वेहद प्रश्नता हुई जब,
भारत में इजरायल के राजदूत HE डेनियल कैमरन ने एक कार्यक्रम विशेष रूप से अपने घर पर किया जो कि इजरायल से आये हिब्रू लेखकों का एशोसिएशन के साथ रूबरू करने का सबसे बेहतरीन अंदाज था दिल्ली में ऐसे मौके पर माननीय राजदूत महोदय ने निमंत्रण दिया इसके लिए हार्दिक धन्यवाद।
माननीय राजदूत डेनियल कैमरन ने कहा है कि भारत और इजरायल हमेशा से मित्र रहे हैं और यह दोस्ती बिना किसी शर्त के है और आगे भी बनी रहेगी साथ ही सभी भारत वासियों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं Tweet कर प्रेषित किया। #Danielcamron
#Anandsahu
ॐ शान्ति
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ
आज प्रातः 7 बजे से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के पांडव भवन करोड़ बाग में शिवरात्रि महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर जस्टिस दीपा शर्मा जी व divine sister Pushpa behen ji Sister Vijay ji, BK Bhai Jagmohan ji और सैकड़ों भाई बहनों ने भाग लिया।
ॐ शांति
#आनन्दसाहू




